मत समझो ख़ुद को कमजोर

तू मत समझ ख़ुद को कमजोर

भय भी भयभीत होकर दूर
चला जाएगा जो तू
मंजिल का राही मुश्किलों में
न घबराएगा
तू रख विश्वास खुद पर
तू बना मंजिल का रास्ता
तू मत समझ ख़ुद को कमजोर
तू मत समझ ख़ुद को बेकार

उर से डर मिटा दे तू
तू रख हौसला बुलंद हर परिस्थिति में
मत खोना आत्मविश्वास
किसी डगर पर तू चलता चल कर्म पथ पर
तू पा लेगा मंजिल इक दिन
बस बिना रुके
तू रख पैनी निगाह मंजिल पर
तू मत समझ ख़ुद को कमजोर

सीखने की चाह रख जीवित सर्वदा
तू सीख ले नन्हे बालकों से
तू सीख ले बुजुर्गों से
तू सीख ले प्रकृति से
तू सीख ले वक्त से
तू इक दिन ज्ञानवान बन जाएगा
तू किसी मुश्किलों में न घबराएगा
तू मत समझ ख़ुद को कमजोर

वक्त की कीमत पहचान
तू कठिनाइयों से हार मत मान
कर कुछ अलग कि
सभी तुझ-सा ही करना चाहे
तू बन एक उदाहरण
तू डर मत तू बढ़ा हौसला ख़ुद का
तू नवीन इतिहास रच
तू मत समझ ख़ुद को कमजोर

©कुमार संदीप(बिहार-मुजफ्फरपुर)

#Motivational_poem

Published by Sandeep Kumar mishra

विद्यार्थियों के हित में सदैव तत्पर रहना मूल लक्ष्य है- गुरु दीक्षा क्लासेज(Sandeep kumar mishra)

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