मत समझ ख़ुद को कमजोर

तू मत समझ ख़ुद को कमजोर

भय भी भयभीत होकर दूर
चला जाएगा जो तू
मंजिल का राही मुश्किलों में
न घबराएगा
तू रख विश्वास खुद पर
तू बना मंजिल का रास्ता
तू मत समझ ख़ुद को कमजोर
तू मत समझ ख़ुद को बेकार

उर से डर मिटा दे तू
तू रख हौसला बुलंद हर परिस्थिति में
मत खोना आत्मविश्वास
किसी डगर पर तू चलता चल कर्म पथ पर
तू पा लेगा मंजिल इक दिन
बस बिना रुके
तू रख पैनी निगाह मंजिल पर
तू मत समझ ख़ुद को कमजोर

सीखने की चाह रख जीवित सर्वदा
तू सीख ले नन्हे बालकों से
तू सीख ले बुजुर्गों से
तू सीख ले प्रकृति से
तू सीख ले वक्त से
तू इक दिन ज्ञानवान बन जाएगा
तू किसी मुश्किलों में न घबराएगा
तू मत समझ ख़ुद को कमजोर

वक्त की कीमत पहचान
तू कठिनाइयों से हार मत मान
कर कुछ अलग कि
सभी तुझ-सा ही करना चाहे
तू बन एक उदाहरण
तू डर मत तू बढ़ा हौसला ख़ुद का
तू नवीन इतिहास रच
तू मत समझ ख़ुद को कमजोर

©कुमार संदीप

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free